ABSTRACT:
प्रतिमान अनुसंधान का दार्शनिक एवं वैचारिक आधार प्रदान करते हैं। तत्त्वमीमांसा, ज्ञानमीमांसा, मूल्यमीमांसा एवं पद्धतिशास्त्र किसी भी प्रतिमान के मूल घटक हैं। शैक्षिक अनुसंधान में प्रत्यक्षवाद, उत्तर-प्रत्यक्षवाद, व्याख्यावाद, निर्माणवाद, आलोचनात्मक प्रतिमान एवं व्यवहारवाद प्रमुख प्रतिमान हैं। प्रत्येक प्रतिमान की अपनी विशिष्ट मान्यताएँ, अनुसंधान विधियाँ एवं उपयोगिता होती है। आधुनिक शैक्षिक अनुसंधान में मिश्रित एवं बहु-प्रतिमानी दृष्टिकोणों का महत्त्व निरंतर बढ़ रहा है।
Cite this article:
रूबी कुमारी. शैक्षिक अनुसंधान में प्रतिमान एवं दृष्टिकोण. शैक्षिक अनुसंधान एवं शोध पद्धति (Educational Research and Research Methodology) (Book). 2026; 1(1): 123-132. ISBN -978-81-997864-6-2
संदर्भ
ग्रंथ सूची
§
कुहन, टी. एस. (1962)। वैज्ञानिक
क्रांतियों की संरचना। शिकागो: यूनिवर्सिटी ऑफ
शिकागो प्रेस।
§
गुबा, ई. जी., एवं लिंकन, वाई. एस. (1994)। गुणात्मक अनुसंधान
में प्रतिस्पर्धी प्रतिमान।
§
क्रेसवेल, जे. डब्ल्यू. (2018)। अनुसंधान अभिकल्प: गुणात्मक, मात्रात्मक एवं
मिश्रित-विधि उपागम।
§
क्रॉटी, एम. (1998)। सामाजिक अनुसंधान
के आधारभूत तत्त्व।
§
कोहेन, एल., मैनियन, एल., एवं मॉरिसन, के. (2018)। शिक्षा में
अनुसंधान की विधियाँ।
§
डेन्ज़िन, एन. के., एवं लिंकन, वाई. एस. (2018)। गुणात्मक अनुसंधान
की सेज हस्तपुस्तिका।